Piles Meaning in Hindi: बवासीर क्या है, क्यों होता है और इसके लक्षण
बवासीर (piles) क्या है, क्यों होता है, खूनी और बादी बवासीर में क्या फ़र्क है, और किन लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

Piles को हिंदी में बवासीर (आयुर्वेद में अर्श) कहते हैं। यह गुदा (anus) के अंदर या आसपास की नसों में होने वाली सूजन है, जो ज़्यादातर लंबे समय की कब्ज़ और मल त्याग के समय ज़ोर लगाने से होती है। ज़्यादातर मामलों में यह खान-पान और आदतें सुधारने से ठीक हो जाती है।
- Piles को हिंदी में बवासीर या अर्श कहते हैं: गुदा (anus) के पास की नसों में सूजन।
- सबसे आम कारण हैं लंबे समय तक कब्ज़, मल त्याग के समय ज़ोर लगाना और कम फ़ाइबर वाला खाना।
- खूनी बवासीर में मल के साथ चमकीला लाल खून आता है; बादी बवासीर में मस्से, दर्द और खुजली होती है।
- ज़्यादातर बवासीर खान-पान और आदतें बदलने से कुछ दिनों में ठीक हो जाती है।
- खून आना, काला मल, तेज़ दर्द या 40 की उम्र के बाद मल की आदत बदलना – इन पर डॉक्टर से ज़रूर मिलें।
बवासीर (Piles) क्या है?
हर व्यक्ति के गुदा में नसों और ऊतकों के छोटे गद्दे (cushions) होते हैं। जब इन पर बार-बार दबाव पड़ता है, तो ये सूजकर फूल जाते हैं। इसी सूजन को बवासीर या piles कहते हैं। अंग्रेज़ी में इसे hemorrhoids भी कहा जाता है।
| भाषा | नाम |
|---|---|
| हिंदी / उर्दू | बवासीर (Bawasir, Bawaseer) |
| आयुर्वेद | अर्श (Arsh) |
| अंग्रेज़ी | Piles, Hemorrhoids |
बवासीर क्यों होता है?
- लंबे समय तक कब्ज़ रहना
- मल त्याग के समय ज़ोर लगाना, या टॉयलेट में देर तक बैठना (जैसे फ़ोन के साथ)
- कम फ़ाइबर वाला खाना: मैदा, तला-भुना, कम फल-सब्ज़ियाँ
- कम पानी पीना
- लंबे समय तक बैठे रहने वाला काम, कम चलना-फिरना
- गर्भावस्था और डिलीवरी के बाद का समय
- ज़्यादा वज़न, भारी वज़न उठाना, लंबे समय तक दस्त रहना
- बढ़ती उम्र
बवासीर के प्रकार: खूनी और बादी बवासीर
| खूनी बवासीर | बादी बवासीर | |
|---|---|---|
| क्या होता है | मल त्याग के बाद चमकीला लाल खून | मस्से, सूजन, दर्द और खुजली; खून कम या नहीं |
| दर्द | अक्सर कम | अक्सर ज़्यादा |
डॉक्टर बवासीर को अंदरूनी (internal) और बाहरी (external) में भी बाँटते हैं, और अंदरूनी बवासीर को 4 स्टेज में। पूरी जानकारी हमारे लेख Piles stages (grade 1–4) में पढ़ें।
बवासीर के लक्षण
- मल त्याग के बाद चमकीला लाल खून (टॉयलेट पेपर या पॉट में)
- गुदा के आसपास खुजली या जलन
- गुदा के पास गाँठ या मस्सा जैसा महसूस होना
- मल त्याग के बाद भी पेट पूरा साफ़ न होने का एहसास
- बैठने में दर्द या बेचैनी
गुदा में तेज़, कटने जैसा दर्द हो तो वह फ़िशर हो सकता है। फ़र्क जानने के लिए पढ़ें: Piles vs fissure vs fistula।
डॉक्टर को कब दिखाएँ?
इन हालात में देर न करें, डॉक्टर से मिलें:
- मल के साथ खून आए और आपकी उम्र 40 से ज़्यादा हो, या खून बार-बार आए
- मल काला या चिपचिपा हो
- 3 हफ़्ते से ज़्यादा समय तक मल की आदत बदली रहे, या वज़न बिना वजह घटे
- तेज़ दर्द हो, बुखार हो, या मस्सा अंदर न जाए
ये लक्षण बवासीर के अलावा किसी और बीमारी के भी हो सकते हैं, इसलिए जाँच ज़रूरी है।
बवासीर में क्या करें?
- फ़ाइबर बढ़ाएँ: फल, सब्ज़ियाँ, दाल, दलिया और इसबगोल। पूरी सूची: बवासीर में क्या खाएँ (डाइट चार्ट)।
- पानी: दिन भर में 8–10 गिलास।
- ज़ोर न लगाएँ और टॉयलेट में देर तक न बैठें।
- गुनगुने पानी में बैठना (sitz bath): दर्द और खुजली में आराम देता है। तरीका: sitz bath गाइड।
- रोज़ चलें और हल्के योगासन करें: बवासीर के लिए योग।
आयुर्वेद में बवासीर को पाचन (अग्नि) और कब्ज़ से जोड़ा जाता है। Dhanyawad Ayurved का Arsh Kuthar Capsule 6 जड़ी-बूटियों (नागकेसर, कुटकी, छोटी हरड़, चित्रक आदि) का आयुर्वेदिक कैप्सूल है, जो पाचन और आसान मल त्याग में सहायक है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Piles को हिंदी में क्या कहते हैं?
Piles को हिंदी में बवासीर कहते हैं। आयुर्वेद में इसे अर्श कहा जाता है, और अंग्रेज़ी में hemorrhoids भी।
बवासीर क्यों होता है?
मुख्य कारण लंबे समय की कब्ज़, मल त्याग के समय ज़ोर लगाना, कम फ़ाइबर वाला खाना, कम पानी, लंबे समय तक बैठे रहना और गर्भावस्था हैं।
खूनी बवासीर और बादी बवासीर में क्या फ़र्क है?
खूनी बवासीर में मल के साथ चमकीला लाल खून आता है। बादी बवासीर में मस्से, सूजन, दर्द और खुजली ज़्यादा होती है, खून कम या नहीं आता।
क्या बवासीर अपने आप ठीक हो सकती है?
छोटी बवासीर अक्सर कुछ दिनों में खान-पान और आदतें सुधारने से ठीक हो जाती है। बार-बार होने या बढ़ने पर डॉक्टर से मिलें।
स्रोत
Written by the Dhanyawad Ayurved team and reviewed by Vaidya Ravinder Arora (40+ years), Dhanyawad Ayurved Vatika, Dwarka, New Delhi. This article describes traditional uses for general information. It is not medical advice. Consult a qualified doctor or Ayurvedic practitioner before using any herb therapeutically.