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मुलेठी के फायदे, उपयोग और सावधानियां – पूरी जानकारी

मुलेठी (Licorice Root) के स्वास्थ्य लाभ, सही मात्रा, उपयोग के तरीके और किन लोगों को इससे बचना चाहिए – आयुर्वेदिक नजरिये से पूरी जानकारी।

मुलेठी के फायदे, उपयोग और सावधानियां – पूरी जानकारी
संक्षेप में

मुलेठी (Licorice Root, वानस्पतिक नाम: Glycyrrhiza glabra) एक जड़ी-बूटी है जिसका उपयोग आयुर्वेद में हजारों वर्षों से गले की खराश, खांसी, पाचन और त्वचा की देखभाल के लिए होता आया है। इसकी तासीर ठंडी होती है और स्वाद मीठा। यह पाउडर या कच्ची जड़ दोनों रूपों में उपलब्ध है।

मुख्य बातें
  • मुलेठी पारंपरिक रूप से गले की खराश, खांसी और पाचन संबंधी समस्याओं में उपयोग की जाती है।
  • इसकी तासीर ठंडी होती है, इसलिए यह पित्त (गर्मी) को शांत करने में सहायक मानी जाती है।
  • सामान्य वयस्कों के लिए 3–5 ग्राम प्रतिदिन की मात्रा उचित है; अधिक मात्रा में दुष्प्रभाव हो सकते हैं।
  • रक्तचाप, मधुमेह या हृदय रोग के मरीज उपयोग से पहले डॉक्टर से अवश्य परामर्श करें।
  • मुलेठी किसी भी बीमारी की दवा नहीं है; यह जीवनशैली और आहार के पूरक के रूप में काम करती है।

मुलेठी क्या है?

मुलेठी एक बारहमासी पौधे की जड़ है जो मुख्यतः भूमध्यसागरीय क्षेत्र, मध्य एशिया और भारत के कुछ हिस्सों में उगती है। इसमें ग्लीसिरिज़िन (Glycyrrhizin) नामक सक्रिय यौगिक होता है, जो चीनी से लगभग 50 गुना मीठा होता है।

भाषा नाम
हिंदी मुलेठी / मुलहठी
अंग्रेज़ी Licorice Root / Liquorice
संस्कृत यष्टिमधु (Yashtimadhu)
वानस्पतिक नाम Glycyrrhiza glabra
उर्दू / फ़ारसी मुलैठी / شیرین بیان

आयुर्वेद में मुलेठी को "मधुयष्टि" भी कहते हैं। यह वात और पित्त दोनों दोषों को संतुलित करने वाली जड़ी-बूटी मानी जाती है।

मुलेठी के प्रमुख फायदे

1. गले की खराश और खांसी में राहत

मुलेठी पारंपरिक रूप से गले की खराश, सूखी खांसी और टॉन्सिल की सूजन में उपयोग की जाती है। यह गले की श्लेष्म झिल्ली (mucous membrane) को नमी प्रदान करती है और जलन को शांत कर सकती है। एक छोटी मुलेठी की छड़ी चूसने या काढ़ा पीने से तत्काल राहत मिल सकती है।

2. पाचन तंत्र को सहारा

मुलेठी पेट की अंदरूनी दीवार पर सुरक्षात्मक प्रभाव डालती है। यह पारंपरिक रूप से अपच, गैस, एसिडिटी और पेट में जलन (gastric discomfort) में उपयोग की जाती है। हालांकि, गंभीर अल्सर या GERD जैसी स्थितियों के लिए डॉक्टर से परामर्श जरूरी है।

3. रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करना

मुलेठी में मौजूद ग्लीसिरिज़िन और फ्लेवोनॉइड्स को पारंपरिक रूप से प्रतिरक्षा प्रणाली को सहायता देने वाला माना जाता है। यह श्वसन संक्रमण में विशेष रूप से उपयोगी मानी जाती है।

4. त्वचा के लिए फायदेमंद

मुलेठी पाउडर को बाहरी रूप से त्वचा पर लगाने की परंपरा रही है। यह त्वचा की लालिमा और जलन को शांत कर सकती है। कुछ लोग इसे हल्दी और गुलाब जल के साथ मिलाकर फेस पैक की तरह उपयोग करते हैं। ध्यान रखें: यह त्वचा का रंग नहीं बदलती; केवल सतह की जलन और लालिमा को शांत कर सकती है।

5. लिवर को सहारा

कुछ पारंपरिक उपयोगों में मुलेठी को लिवर के लिए टॉनिक माना गया है। हालांकि, लिवर की बीमारी में स्वयं मुलेठी का उपयोग न करें — पहले डॉक्टर से सलाह लें क्योंकि अधिक मात्रा में इसका विपरीत प्रभाव भी हो सकता है।

6. सांस की समस्याओं में सहायक

मुलेठी को पारंपरिक आयुर्वेदिक नुस्खों में अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और श्वसन मार्ग की सूजन में शामिल किया जाता रहा है। यह कफ को नरम करके बाहर निकालने में सहायक हो सकती है।

मुलेठी की तासीर कैसी होती है?

मुलेठी की तासीर ठंडी होती है। इसीलिए यह गर्मियों में या पित्त-प्रधान लोगों (जिन्हें अक्सर एसिडिटी, जलन या शरीर में अधिक गर्मी लगती है) के लिए विशेष रूप से उपयोगी मानी जाती है। वात-प्रकृति वालों को सर्दियों में इसकी मात्रा कम रखनी चाहिए।

मुलेठी का उपयोग कैसे करें

उपयोग का तरीका विधि किसके लिए उपयुक्त
कच्ची जड़ चूसना छोटी छड़ी सीधे मुंह में रखें गले की खराश, खांसी
काढ़ा / चाय 1 चम्मच पाउडर 1 कप पानी में 5 मिनट उबालें, छानकर पिएं पाचन, रोग प्रतिरोधक क्षमता
शहद के साथ ½ चम्मच पाउडर + 1 चम्मच शहद, सुबह खाली पेट खांसी, गले की समस्या
फेस पैक मुलेठी पाउडर + गुलाब जल का पेस्ट बनाकर लगाएं त्वचा की जलन, लालिमा
दूध के साथ ½ चम्मच पाउडर गर्म दूध में मिलाकर रात को पिएं सामान्य टॉनिक

1 दिन में कितनी मुलेठी खानी चाहिए?

सामान्य वयस्कों के लिए 3–5 ग्राम प्रतिदिन (लगभग ½ से 1 चम्मच पाउडर) उचित मात्रा मानी जाती है। इसे लगातार 4–6 सप्ताह से अधिक न लें। इससे अधिक मात्रा में ग्लीसिरिज़िन के कारण रक्तचाप बढ़ सकता है और पोटैशियम का स्तर गिर सकता है। हमेशा कम मात्रा से शुरू करें।

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मुलेठी के दुष्प्रभाव और सावधानियां

मुलेठी सुरक्षित है जब उचित मात्रा में ली जाए, लेकिन इन स्थितियों में विशेष सावधानी या परहेज जरूरी है:

  • उच्च रक्तचाप (High BP): मुलेठी रक्तचाप बढ़ा सकती है — BP दवाएं बंद न करें, डॉक्टर से पूछें।
  • मधुमेह (Diabetes): मुलेठी मीठी होती है और रक्त शर्करा को प्रभावित कर सकती है — डॉक्टर से परामर्श लें।
  • गर्भावस्था: गर्भावस्था में मुलेठी का उपयोग न करें।
  • हृदय रोग: ग्लीसिरिज़िन पोटैशियम असंतुलन पैदा कर सकती है — डॉक्टर से सलाह लें।
  • लिवर या किडनी की बीमारी: बिना डॉक्टर की सलाह के उपयोग न करें।
  • बच्चों में: 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को बिना डॉक्टरी सलाह के न दें।

मुलेठी पाउडर बनाम कच्ची मुलेठी की जड़ – क्या फर्क है?

मुलेठी दो रूपों में मिलती है — सूखी कच्ची जड़ और पाउडर। दोनों के अपने-अपने फायदे हैं:

तुलना का बिंदु कच्ची मुलेठी जड़ मुलेठी पाउडर
उपयोग चूसना, चाय में डालना काढ़ा, पेस्ट, दूध में मिलाना
सुविधा यात्रा में आसान सटीक मात्रा लेना आसान
शेल्फ लाइफ अधिक (2–3 वर्ष) कम (1–1.5 वर्ष, नमी से बचाएं)
पाचन में उपयोग धीरे-धीरे रिलीज तेज़ अवशोषण
बाहरी उपयोग (त्वचा) उपयुक्त नहीं फेस पैक के लिए उपयुक्त

सामान्य उपयोग के लिए दोनों समान रूप से प्रभावी हैं। यदि आप मुख्य रूप से गले की खराश या खांसी के लिए ले रहे हैं तो कच्ची जड़ चूसना अधिक सुविधाजनक है। पाचन या त्वचा के लिए पाउडर बेहतर रहता है।

मुलेठी को कैसे स्टोर करें?

मुलेठी को नमी और सीधी धूप से बचाकर रखें। पाउडर को कसकर बंद कांच या स्टील के डिब्बे में रखें। कच्ची जड़ को कागज या कपड़े की थैली में सूखी जगह रखें — प्लास्टिक बैग में नमी जमा होती है। सही तरीके से रखने पर पाउडर 12–18 महीने और कच्ची जड़ 2–3 वर्ष तक उपयोगी रहती है।

मुलेठी खाने के बाद क्या नहीं खाना चाहिए?

मुलेठी के तुरंत बाद अत्यधिक खट्टी चीजें (नींबू, इमली) और बहुत तीखा भोजन लेने से बचें क्योंकि यह पाचन प्रभाव को कम कर सकते हैं। यदि आप कोई दवा ले रहे हैं — विशेष रूप से BP, मधुमेह या हृदय की दवाएं — तो मुलेठी शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर को बताएं।

मुलेठी खरीदें – Dhanyawad Ayurved

Dhanyawad Ayurved की मुलेठी साफ, सुखी और बिना मिलावट के उपलब्ध है — पाउडर और कच्ची जड़ दोनों रूपों में। 50 ग्राम पाउडर या कच्ची जड़ ₹70 में, और 100 ग्राम ₹135 में उपलब्ध है। यहाँ खरीदें।

अन्य उपयोगी जड़ी-बूटियों के बारे में पढ़ें: गिलोय के फायदे, इसबगोल के फायदे, और जायफल के फायदे।

डॉक्टर को कब दिखाएं

मुलेठी एक पारंपरिक जड़ी-बूटी है — किसी बीमारी का इलाज नहीं। अपनी कोई भी दवा बंद न करें। यदि आपको गले में 3–4 दिन से अधिक खराश, खांसी में खून, सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द, अचानक वजन घटना या पीलिया के लक्षण हों तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मुलेठी खाने से कौन सी बीमारी में फायदा होता है?

मुलेठी पारंपरिक रूप से गले की खराश, सूखी खांसी, एसिडिटी, अपच और हल्की सांस की तकलीफ में उपयोगी मानी जाती है। यह किसी भी बीमारी का इलाज नहीं करती; यह राहत और सहायता देती है। किसी भी गंभीर या लंबी बीमारी के लिए डॉक्टर से मिलें।

पुरुषों के लिए मुलेठी पाउडर के क्या फायदे हैं?

मुलेठी पुरुषों में ऊर्जा और पाचन स्वास्थ्य को सहारा दे सकती है। यह पारंपरिक रूप से टॉनिक के रूप में उपयोग की जाती है। यौन प्रदर्शन संबंधी किसी भी दावे का समर्थन करने के लिए पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं।

क्या मुलेठी की तासीर गर्म होती है या ठंडी?

मुलेठी की तासीर ठंडी होती है। आयुर्वेद में इसे पित्त-शामक (शरीर की गर्मी कम करने वाली) जड़ी-बूटी माना जाता है। गर्मियों में यह विशेष रूप से उपयोगी है। सर्दियों में अधिक मात्रा में लेने से कफ बढ़ सकता है।

1 किलो मुलेठी की कीमत क्या है?

मुलेठी की कीमत गुणवत्ता और रूप (कच्ची जड़ या पाउडर) पर निर्भर करती है। Dhanyawad Ayurved पर 100 ग्राम मुलेठी ₹135 में उपलब्ध है। बाजार में थोक में कीमत ₹200–₹600 प्रति किलो तक हो सकती है।

मुलेठी और शहद साथ में कैसे लें?

½ चम्मच मुलेठी पाउडर में 1 चम्मच शुद्ध शहद मिलाकर सुबह खाली पेट लें। यह गले और खांसी के लिए पारंपरिक नुस्खा है। मधुमेह के रोगी शहद का उपयोग डॉक्टर की सलाह से ही करें।

क्या मुलेठी रोज ले सकते हैं?

हाँ, लेकिन लगातार 4–6 सप्ताह से अधिक न लें। रोज़ाना 3–5 ग्राम से अधिक मात्रा न लें। लंबे समय तक अधिक मात्रा में लेने से रक्तचाप बढ़ सकता है। बीच में 2–3 सप्ताह का अंतराल रखें।

मुलेठी का काढ़ा कैसे बनाएं?

एक कप पानी में 1 चम्मच मुलेठी पाउडर या 2–3 छोटी जड़ के टुकड़े डालें। 5–7 मिनट उबालें, फिर छान लें। चाहें तो थोड़ी अदरक और काली मिर्च भी मिला सकते हैं। गर्म या हल्का गुनगुना पिएं।

स्रोत

Mulethi | Licorice Root | मुलेठी
From Dhanyawad Ayurved
Mulethi | Licorice Root | मुलेठी
From Rs. 70.00
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Written by the Dhanyawad Ayurved team and reviewed by Vaidya Ravinder Arora (40+ years), Dhanyawad Ayurved Vatika, Dwarka, New Delhi. This article describes traditional uses for general information. It is not medical advice. Consult a qualified doctor or Ayurvedic practitioner before using any herb therapeutically.